BhumiharBiharPolitics

Bochaha By Election: 32 साल तक लालू से लड़ने वाले भूमिहारों ने आशुतोष कुमार पर विश्वास कर खुलकर किया समर्थन, RJD जीती बोचहां उपचुनाव

Bochaha By Election: 32 साल तक लालू से लड़ने वाले भूमिहारों ने आशुतोष कुमार पर विश्वास कर खुलकर किया समर्थन, अंततः बोचहां उपचुनाव मे राजद के अमर पासवान को मिली बड़ी जीत. आपको बताएं भूमिहारों को अपना कठपुतली समझने वाले भाजपा को आखिरकार भूमिहारों ने सबक सिखा हीं दिया.

बापू सभागार पटना में 3 मई को होने वाले भव्य “परशुराम शोभा यात्रा” का तेजश्वि यादव को आमंत्रित करने के बाद आशुतोष कुमार ने बोचहां उपचुनाव में राजद के अमर पासवान का समर्थन किया था तथा भूमिहारों से उनको समर्थन करने का अपील किया था. राजद के समर्थन के बाद मीडिया द्वारा “भुराबाल साफ करो” वाले नारे पर सवाल का जबाब देते हुए आशुतोष कुमार ने कहा लालू यादव ने सिर्फ नारा दिया था लेकिन नीतीश कुमार ने इसे पुरा करके दिखाया है.

Bochaha By Election (बोचहां उपचुनाव)

तेजस्वी का A to Z कार्ड

2020 के विधानसभा चुनाव में ही तेजस्वी ने नया नारा दिया था.उनकी पार्टी राजद सिर्फ एमवाई की पार्टी नहीं है. उन्होंने कहा था राजद ए टू जेड की पार्टी है. 2020 में तेजस्वी अपने दल को ए टू जेड की पार्टी बनाने में पूरी तरह सफल तो नहीं हो पाये लेकिन डेढ़ साल बाद उनका नारा सच होता दिख रहा है.

शनिवार को जब बोचहां उप चुनाव का रिजल्ट आया तो मैसेज यही है- राजद ए टू जेड की पार्टी बनने की ओर बढ़ चली है. बोचहां उप चुनाव में राजद से खफा भूमिहार द्वारा समर्थन पाकर ए टू जेड वाला दवा सही होते दिख रहा है. अब देखना ये है की क्या तेजश्वि यादव का ये नारा 2024 के लोकसभा चुनाव में कितना सही होगा.

बोचहां की जीत ऐतिहासिक है

बोचहां के उप चुनाव में राजद की जीत के बड़े मायने हैं. ये सच है कि इस सीट के परिणाम से बिहार में सरकार नहीं बदल जायेगी. लेकिन इस उप चुनाव के रिजल्ट ने बिहार में सियासी परसेप्शन को बदल दिया है. जिस बोचहां सीट पर रमई राम जैसे दिग्गज उम्मीदवार को खड़ा करने के बावजूद राजद 2015 और 2020 दोनों चुनाव में बुरी तरह हारी, उसी सीट पर उप चुनाव में राजद ने सबसे बड़ी जीत हासिल की.

अपने क्षेत्र के सभी खबर पाने के लिए हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें

बोचहां में राजद के उम्मीदवार अमर पासवान ने 36 हजार 653 वोटों से जीत हासिल की. राजद को इस क्षेत्र में साढ़े 48 प्रतिशत से भी ज्यादा वोट मिले. राजद को मिले वोट परसेंटेंज ही बताने के लिए काफी है कि उसे समाज के हर तबके का वोट मिला। जहाँ भाजपा के कई बड़े चेहरे बेबी कुमारी का समर्थन कर रहे थे वहीं राजद का जीत बहुत कुछ कहता है.

तेजस्वी की सबसे बड़ी सफलता

तेजस्वी जब अपनी पार्टी को ए टू जेड की पार्टी बताते थे तो सियासी जानकार A के बाद B पर आकर अटक जाते थे. बिहार की सियात में B का मतलब भूमिहार होता था. 1990 में लालू यादव के सत्ता में आने के बाद लालू की सियासत भूमिहार विरोध की धुरी पर ही आगे बढती रही. भूमिहारों ने ही लालू यादव के खिलाफ सबसे उग्र लडाई लड़ी. लालू विरोध की राजनीति का नतीजा ये हुआ कि भूमिहार खुद ब खुद बीजेपी और जेडीयू के वोट बैंक बन गये. इसके लिए बीजेपी-जेडीयू को कोई खास मेहनत नहीं करनी पड़ी. लेकिन बोचहां ने मैसेज दे दिया है कि सियासी हवा का रूख बदल गया है।

विधान परिषद चुनाव से दिया बड़ा मैसेज

2020 में मामूली अतंर से सत्ता से दूर रह जाने का मलाल झेल रहे तेजस्वी यादव को लग रहा था कि उन्हें अपनी सीएम की कुर्सी तक पहुंचने के लिए रणनीति बदलनी पड़ेगी। इसलिए उनकी निगाहें उस तबके पर गयी जिसे वह चाह कर भी अपने पाले में नहीं ला पा रहे थे. इसी बीच स्थानीय निकाय कोटे से बिहार विधान परिषद का चुनाव आया.

तेजस्वी ने 23 सीटें लड़ीं, जिनमें से 5 पर भूमिहार प्रत्याशी को मैदान में उतार दिया. बिहार की सियासत के लिए ये अजूबा वाकया था. लेकिन तेजस्वी प्रयोग करने पर आमदा थे. उन्होंने पटना, मुंगेर, पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण जैसे विधान परिषद सीट पर अपने परंपरागत वोट बैंक के उम्मीदवारों को खारिज कर भूमिहार उम्मीदवार खड़ा कर दिया. इसका नतीजा भी सामने आया. राजद के 5 भूमिहार उम्मीदवार में से तीन चुनाव जीत गये. एक और उम्मीदवार बबलू देव बेहद कम अंतर से चुनाव हारे।

सियासी जानकार बताते हैं कि विधान परिषद चुनाव में तेजस्वी के इस एक कदम ने राजद और भूमिहारों के बीच फासले को काफी कम कर दिया. भूमिहारों का एक तबका भले ही अब भी लालू यादव के दौर में नरसंहारों की बात करता है. लेकिन उसी समाज का बडा तबका पुरानी बातों को भूल कर नयी शुरूआत करने की बात।

बिहार MLC चुनाव परिणाम को देख, अब बोचहां उपचुनाव में भूमिहार दिखाएगी अपनी ताकत, आशुतोष कुमार का अमर पासवान को समर्थन

भूमिहारों ने माथे पर उठा लिया लालटेन

बोचहां उप चुनाव परिणाम ने तेजस्वी के ए टू जेड वाले नैरेटिव पर एक तरीके से मुहर लगा दिया है. इसके लिए आप बोचहां विधानसभा क्षेत्र के जातिगत समीकरण को समझिये. जाति के आधार पर देखें तो बोचहां विधानसभा सीट पर सबसे ज्यादा वोट भूमिहारों के है. उप चुनाव परिणाम से ये स्पष्ट है कि इस तबके के वोट का बड़ा हिस्सा राजद उम्मीदवार को मिला.

वहीं फर्स्ट बिहार मीडिया से बात करते हुए बोचहां विधानसभा क्षेत्र के शेरपुर गांव के रोहित ने कहा- हां, हमलोगों ने माथे पर लालटेन उठा लिया है. बहुत दिन कमल और तीर उठा लिया. हम किसी के बंधुआ मजदूर बन कर नहीं रहेंगे। हम आशुतोष कुमार के दिखाये मार्ग पर चलेंगे. जो हमारी बात करेगा, वो हमपे राज करेगा का नारा लगाते हुए रोहित खुश नजर आ रहा था.

बड़ा सियासी परिवर्तन होगा

बोचहां के रिजल्ट से दिख रहा परिवर्तन बड़ा सियासी उलटफेर करा सकता है. मुजफ्फरपुर के एक पत्रकार ने कहा- आप पूरे बिहार की नहीं सिर्फ मुजफ्फरपुर जिले की ही बात कर लीजिये. मुजफ्फरपुर में लोकसभा की दो औऱ विधानसभा की 11 सीटें हैं. लोकसभा की दोनों सीटों पर एनडीए के सांसद जीते हैं. उन्हें मिले वोटों में से भूमिहारों का वोट निकाल कर राजद उम्मीदवार में जोड़ दीजिये. रिजल्ट क्या होगा इसका अंदाजा हो जायेगा. मुजफ्फरपुर जिले में साहेबगंज, पारू, औराई जैसी विधानसभा सीटों पर एनडीए के विधायक हैं.

ये सारी सीटें ऐसी हैं जहां भूमिहारों का अच्छा खासा वोट है और वहां भाजपा के गैर भूमिहार उम्मीदवार जीते. तेजस्वी का ए टू जेड का फार्मूला अगर अगले विधानसभा चुनाव तक कायम रहा तो बीजेपी समझ रही होगी कि उसका क्या होने वाला है। कुल मिला कर कहें तो बोचहां सीट पर उपचुनाव के रिजल्ट से बिहार में सत्ता परिवर्तन तो नहीं होने वाला है लेकिन सियासी समीकरणों में बड़ा उलटफेर हो गया है. आने वाले दिनों में इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है.

जीतनराम मांझी का फिर विवादित बयान, बोले- ‘राम भगवान नहीं… वो महज किरदार’…

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button